ग़ज़ल

चुरा लिया है तुमने जो दिल को

मजरूह सुल्तानपुरी · सब कलाम देखें
चुरा लिया है तुम ने जो दिल कोनज़र नहीं चुराना सनमबदल के मेरी तुम ज़िंदगानीकहीं बदल न जाना सनम
ले लिया दिल, हाय मेरा दिलहाय दिल लेकर मुझको ना बहलानाचुरा लिया... चुरा लिया है ...
बहार बन के आऊँ कभी तुम्हारी दुनिया मेंगुज़र न जाएं ये दिन कहीं इसी तमन्ना मेंतुम मेरे हो, हाँ तुम मेरे होआज तुम इतना वादा करते जानाचुरा लिया ... चुरा लिया है ...
सजाऊँगा लुट कर भी तेरे बदन की डोली कोलहू जिगर का दूँगा हंसीं लबों की लाली कोहै वफ़ा क्या, इस जहाँ कोएक दिन दिखला दूँगा मैं दीवानाचुरा लिया... चुरा लिया है ...
ले लिया दिल, हाय मेरा दिलहाय दिल लेकर मुझको ना बहलानाचुरा लिया... चुरा लिया है ...
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