ग़ज़ल

छोड़ दो आँचल जमाना क्या कहेगा

मजरूह सुल्तानपुरी · सब कलाम देखें
आ: छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगाछोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगाक: (इन अदाओं का ज़माना भी हैं दीवानादीवाना क्या कहेगा ) \- (२)आ: छोड़ दो आंचल ज़माना क्या कहेगा
आ: मैं चलीमैं चली अब खूब छेड़ो प्यार के अफ़सानेकुछ मौसम हैं दीवाना कुछ तुम भी हो दीवाने (२)क: ज़रा सुनना जान\-ए\-तमन्ना (२)इतना तो सोचिये मौसम सुहाना क्या कहेगाआ: छोड़ दो आंचल ...
आ: यूँ न देखो जाग जाए प्यार की अंगड़ाईये रस्ता ये तनहाई लो दिल ने ठोकर खाईक: यही दिन हैं मस्ती के सिन हैं (२)किसको ये होश है अपना बेगाना क्या कहेगाआ: छोड़ दो आंचल ...
आ: ये बहारें ये फुवारें ये बरसता सावनथर थर काँपे हैं तन मन मेरी बय्याँ धर लो साजनक: अजी आना दिल में समाना (२)एक दिल एक जान हैं हम तुम ज़माना क्या कहेगाआ: छोड़ दो आंचल ...
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