ग़ज़ल
छलकाएँ जाम, आइए आपकी आँखों के नाम
छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नामहोंठों के नाम
फूल जैसे तन के जलवे, ये रँग\-ओ\-बू केये रँग\-ओ\-बू केआज जाम\-ए\-मय उठे, इन होंठों को छूकेइन होंठों को छूकेलचकाइये शाख\-ए\-बदन, लहराइये ज़ुल्फों की शामछलकाएं जाम ...
आपका ही नाम लेकर, पी है सभी नेपी है सभी नेआप पर धड़क रहे हैं, प्यालों के सीनेप्यालों के सीनेयहाँ अजनबी कोई नहीं, ये है आपकी महफ़िल तमामछलकाएं जाम ...
कौन हर किसी की बाहें, बाहों में डाल लेबाहों में डाल लेजो नज़र को शाख लाए, वो ही सम्भाल लेवो ही सम्भाल लेदुनिया को हो औरों की धुन, हमको तो है साक़ी से कामछलकाएं जाम ...
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