ग़ज़ल
गुम है किसी के प्यार में, दिल सुबह शाम
किशोर: गुम है किसी के प्यार में, दिल सुबह शामपर तुम्हें लिख नहीं पाऊँ, मैं उसका नामहाय राम, हाय रामरंधीर: कुछ लिखा?रेखा: हाँरंधीर: क्या लिखा?लता: गुम है किसी के प्यार में, दिल सुबह शामपर तुम्हें लिख नहीं पाऊँ, मैं उसका नामहाय राम, हाय रामरेखा: अच्छा, आगे क्या लिखूँ?रंधीर: आगे?
किशोर: सोचा है एक दिन मैं उससे मिलकेकह डालूँ अपने सब हाल दिल केऔर कर दूँ जीवन उसके हवालेफिर छोड़ दे चाहे अपना बना लेअब तो जैसे भी मेरा हो अंजाम
गुम है किसी के प्यार में, दिल सुबह शामपर तुम्हें लिख नहीं पाऊँ, मैं उसका नाम,हाय राम, हाय रामरंधीर: लिख लिया?रेख: हाँरंधीर: ज़रा पढ़के तो सुनाओ
लता: चाहा है तुमने जिस बावरी कोवो भी सजनवा चाहे तुम्हीं कोनैना उठाए तो प्यार समझोपलकें झुका दे तो इक़रार समझोरखती है कब से छुपा छुपा केरंधीर: क्या?लता: अपने होंठों में पिया तेरा नाम
गुम है किसी के प्यार में, दिल सुबह शामपर तुम्हें लिख नहीं पाऊँ, मैं उसका नामहाय राम, हाय राम
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