ग़ज़ल
इक लड़की भीगी भागी सी
इक लड़की भीगी\-भागी सीसोती रातों को जागी सीमिली इक अजनबी सेकोई आगे न पीछेतुम ही कहो ये कोई बात है
दिल ही दिल में जली जाती हैबिगड़ी बिगड़ी चली आती हैमचली मचली घर से निकलीपगली सी काली रात मेंमिली इक अजनबी सेकोई आगे न पीछेतुम ही कहो ये कोई बात हैइक लड़की ...
डगमग डगमग लहकी लहकीभूली भटकी बहकी बहकीबलखाती हुई, इठलाती हुईसावन की सूनी रात मेंमिली इक अजनबी सेकोई आगे न पीछेतुम ही कहो ये कोई बात हैइक लड़की ...
तन भीगा है सर गीला हैउस का कोई पेच भी ढीला हैतनती झुकतीचलती रुकतीनिकली अंधेरी रात मेंमिली इक अजनबी सेकोई आगे न पीछेतुम ही कहो ये कोई बात हैइक लड़की ...
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