ग़ज़ल

ओ हसीना जुल्फ़ों वाली जाने जहाँ

मजरूह सुल्तानपुरी · सब कलाम देखें
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशांओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशांमहफ़िल महफ़िल ऐ शमा फिरती हो कहाँ \- २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँवो दीवाना ढूँढती हूँजलाकर जो छिप गया हैवो परवाना ढूँढती हूँ
आशा: गर्म है, सेज़ है, ये निगाहें मेरीरफ़ी: काम आ, जायेगी सर्द, आहें मेरीआशा: तुम किसी, राह में, तो मिलोगे कहींरफ़ी: अरे! इश्क़ हूँ, मैं कहीं ठहरता ही नहींआशा: मैं भी हूँ गलियों की परछाईकभी यहाँ कभी वहाँशाम ही से कुछ हो जाता हैमेरा भी जादू जवां
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशांमहफ़िल महफ़िल ऐ शमा फिरती हो कहाँ \- २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँवो दीवाना ढूँढती हूँजलाकर जो छिप गया हैवो परवाना ढूँढती हूँ
आशा: छिप रहे, है ये, क्या ढंग है आपका?रफ़ी: आज तो, कुछ नया, रंग है आपकाआशा: है! आज की, रात मैं, क्या से क्या हो गयीरफ़ी: अह! आपकी सादगी, तो भला हो गयीआशा: मैं ही हूँ गलियों की परछाईकभी यहाँ कभी वहाँशाम ही से कुछ हो जाता हैमेरा भी जादू जवां
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशांमहफ़िल महफ़िल ऐ शमा फिरती हो कहाँ \- २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँवो दीवाना ढूँढती हूँजलाकर जो छिप गया हैवो परवाना ढूँढती हूँ
आशा: ठहरिये, तो सही, कहिये क्या नाम हैरफ़ी: मेरी बदनामियों का वफ़ा नाम हैआशा: ओहो! क़त्ल कर के चले ये वफ़ा, खूब हैरफ़ी: है! नादां तेरी, ये अदा, खूब हैआशा: मैं भी हूँ गलियों की परछाईकभी यहाँ कभी वहाँशाम ही से कुछ हो जाता हैमेरा भी जादू जवां
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशांमहफ़िल महफ़िल ऐ शमा फिरती हो कहाँ \- २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँवो दीवाना ढूँढती हूँजलाकर जो छिप गया हैवो परवाना ढूँढती हूँ!!!
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