ग़ज़ल
ठाढ़े रहियो ओ बाँके यार
चाँदनी रात बड़ी देर के बाद आई हैये मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आई हैआज की रात वो आए हैं बड़ी देर के बादआज की रात बड़ि देर के बाद आई है
ठाड़े रहियो ओ बाँके यार रे ठाड़े रहियोठाड़े रहियो \- (३)
ठहरो लगाय आऊँ, नैनों में कजराचोटी में गूँद लाऊँ फूलों का गजरामैं तो कर आऊँ सोलह श्रृंगार रे \- (३)ठाड़े रहियो...
जागे न कोई, रैना है थोड़ीबोले छमाछम पायल निगोड़ी... बोले
निगोड़ी... बोले...अजी धीरे से खोलूँगी द्वार रेसैयाँ धीरे से खोलूँगी द्वार रेमैं तो चुपके सेअजी हौले से खोलूँगी द्वार रेठाड़े रहियो...
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