ग़ज़ल

ऐसे न मुझे तुम देखो, सीने से लगा लूँगा

मजरूह सुल्तानपुरी · सब कलाम देखें
ऐसे न मुझे तुम देखोसीने से लगा लूँगातुम को मैं चुरा लूँगा तुमसेदिल में बसा (छुपा???) लूँगा
तेरे दिल से ऐ दिलबर दिल मेरा कहता हैप्यार के दुश्मन लोग मुझे डर लगता रहता हैथाम लो तुम मेरी बाहों मैं तुम्हें सम्भालूँगातुमको मैं चुरा लूँगा तुमसेदिल में बसा लूँगा
धीमी\-धीमी आग से शोला भड़काया हैदूर से तुमने इस दिल को कितना तड़पाया हैमैं अब इस दिल के सारे अर्मां निकालूँगातुम को मैं चुरा लूँगा तुमसेदिल में बसा लूँगा
प्यार के दामन में चुन कर हम फूल भर लेंगेरास्ते के सारे काँटे दूर कर देंगेजान\-ए\-मन तुमको अपनी मैं जान बना लूँगातुम को मैं चुरा लूँगा तुमसेदिल में बसा लूँगा
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