ग़ज़ल
ओ मेरे दिल के चैन
ओ मेरे, दिल के चैन,चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिये
अपना ही साया देख के तुम जाने जहाँ शरमा गएअभी तो ये पहली मंज़िल है, तुम तो अभी से घबरा गएमेरा क्या होगा, सोचो तो जराहाय ऐसे ना आँहें भरा कीजियेओ मेरे दिल के चैन ...
आपका अरमाँ आपका नाम, मेरा तराना और नहींइन झुकती पलको के सिवा, दिल का ठिकाना और नहींजंचता ही नहीं आँखो में कोईदिल तुमको ही चाहे तो क्या कीजियेओ मेरे दिल के चैन ...
यूँ तो अकेला ही अक़सर, गिर के सम्भल सकता हूँ मैंतुम जो पकड़ लो हाथ मेरा, दुनिया बदल सकता हूँ मैंमांगा है तुम्हें दुनिया के लियेअब ख़ुद ही सनम फ़ैसला कीजियेओ मेरे दिल के चैन ...
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