ग़ज़ल
कोई जब राह न पाए, मेरे सँग आए
कोई जब राह न पाए, मेरे संग आएके पग पग दीप जलाए, मेरी दोस्ती मेरा प्यार
जीवन का यही है दस्तूरप्यार बिना अकेला मजबूरदोस्ती को माने तो सब दुख दूरकोई काहे ठोकर खाए, मेरे संग आए ...
दोनो के हैं रूप हज़ारपर मेरी सुने जो संसारदोस्ती है भाई तो बहना है प्यारकोई मत चैन चुराए, मेरे संग आए ...
प्यार का है प्यार ही नामकहीं मीरा कहीं घनश्यामदोस्ती का यारो नहीं कोई दामकोइ कहीं दूर ना जाए, मेरे संग आए ...
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