ग़ज़ल
चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे
चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरेफिर भी कभी अब नाम को तेरेआवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा
देख मुझे सब है पतासुनता है तू मन की सदा (२)मितवा ...मेरे यार तुझको बार बारआवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगाचाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे
दर्द भी तू चैन भी तूदरस भी तू नैन भी तूमितवा ...मेरे यार तुझको बार बारआवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा
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