ग़ज़ल
ओ हँसनी मेरी हँसनी, कहाँ उड़ चली
(ओ हँसनी मेरी हँसनी, कहाँ उड़ चलीमेरे अरमानो के पँख लगाके, कहाँ उड़ चली)\- २
(आजा मेरी साँसों मैं महक रहा रे तेरा गजराओ आजा मेरी रातों मैं लहक रहा रे तेरा कजरा)\- २
ओ हँसनी ... मेरी हँसनी, कहाँ उड़ चली,मेरे अरमानो के पँख लगाके, कहाँ उड़ चली
(देर से लहरों मैं कमल सम्भाले हुए मन काजीवन टाल मैं भटक रहा रे तेरा हँसा)\- २
ओ हँसनी ... मेरी हँसनी, कहाँ उड़ चली,मेरे अरमानो के पँख लगाके, कहाँ उड़ चलीकहाँ उड़ चली कहाँ उड़ चली ...
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