ग़ज़ल
जब तक रहे तन में जिया
जब तक रहे तन में जिया वादा रहा, ओ साथियाहम तुम्हारे लिये तुम हमारे लियेओ... हम तुम्हारे लिये तुम हमारे लिये
धूप लगेगी जब जब तुमको सजनाओ डारून्गी मैं आंचल की छैयांसाँझ पड़े जब थक जाओगे बलमावारूँगी मैं गोरी गोरी बैयांडोलूँगी बनके चाँदनी मैं तेरे अँगनाजब तक रहे तन में जिया वादा रहा ओ साथियाहम तुम्हारे लिये तुम हमारे लिये
सारी जनम को अब तो अपने तन पे हाँओ ओढ़ी चुनरिया मैंने साजन कीखिली रहे मुस्कान तेरी फिर चाहेओ लुट जाये बगिया मेरे जीवन कीमैं जीवन छोड़ दूँ छोड़ूँ न मैं तेरी गलियांजब तक रहे तन में जिया वादा रहा ओ साथियाहम तुम्हारे लिये तुम हमारे लिये
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