ग़ज़ल

अधिकार

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
वे मुस्काते फूल, नहींजिनको आता है मुर्झाना,वे तारों के दीप, नहींजिनको भाता है बुझ जाना;
वे नीलम के मेघ, नहींजिनको है घुल जाने की चाहवह अनन्त रितुराज,नहींजिसने देखी जाने की राह|
वे सूने से नयन,नहींजिनमें बनते आँसू मोती,वह प्राणों की सेज,नहीजिसमें बेसुध पीड़ा सोती;
ऐसा तेरा लोक, वेदनानहीं,नहीं जिसमें अवसाद,जलना जाना नहीं, नहींजिसने जाना मिटने का स्वाद!
क्या अमरों का लोक मिलेगातेरी करुणा का उपहार?रहने दो हे देव! अरेयह मेरा मिटने का अधिकार!
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