ग़ज़ल

फूल

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
मधुरिमा के, मधु के अवतारसुधा से, सुषमा से, छविमान,आंसुओं में सहमे अभिरामतारकों से हे मूक अजान!सीख कर मुस्काने की बानकहां आऎ हो कोमल प्राण!
स्निग्ध रजनी से लेकर हासरूप से भर कर सारे अंग,नये पल्लव का घूंघट डालअछूता ले अपना मकरंद,ढूढं पाया कैसे यह देश?स्वर्ग के हे मोहक संदेश!
रजत किरणों से नैन पखारअनोखा ले सौरभ का भार,छ्लकता लेकर मधु का कोषचले आऎ एकाकी पार;कहो क्या आऎ हो पथ भूल?मंजु छोटे मुस्काते फूल!
उषा के छू आरक्त कपोलकिलक पडता तेरा उन्माद,देख तारों के बुझते प्राणन जाने क्या आ जाता याद?हेरती है सौरभ की हाटकहो किस निर्मोही की बाट?
चांदनी का श्रृंगार समेटअधखुली आंखों की यह कोर,लुटा अपना यौवन अनमोलताकती किस अतीत की ओर?जानते हो यह अभिनव प्यारकिसी दिन होगा कारगार?
कौन है वह सम्मोहन रागखींच लाया तुमको सुकुमार?तुम्हें भेजा जिसने इस देशकौन वह है निष्ठुर करतार?हंसो पहनो कांटों के हारमधुर भोलेपन का संसार!
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