ग़ज़ल

जो तुम आ जाते एक बार

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
जो तुम आ जाते एक बार
कितनी करूणा कितने संदेशपथ में बिछ जाते बन परागगाता प्राणों का तार तारअनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पथ पखारजो तुम आ जाते एक बार
हँस उठते पल में आर्द्र नयनधुल जाता होठों से विषादछा जाता जीवन में बसंतलुट जाता चिर संचित विराग
आँखें देतीं सर्वस्व वारजो तुम आ जाते एक बार
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