ग़ज़ल

जाने किस जीवन की सुधि ले

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
जाने किस जीवन की सुधि ले
लहराती आती मधु-बयार!रंजित कर ले यह शिथिल चरण, ले नव अशोक का अरुण राग,मेरे मण्डन को आज मधुर, ला रजनीगन्धा का पराग;यूथी की मीलित कलियों सेअलि, दे मेरी कबरी सँवार।
पाटल के सुरभित रंगों से रँग दे हिम-सा उज्जवल दुकूल,गूँथ दे रशमा में अलि-गुंजन से पूरित झरते बकुल-फूल;रजनी से अंजन माँग सजनि,दे मेरे अलसित नयन सार !
तारक-लोचन से सींच सींच नभ करता रज को विरज आज,बरसाता पथ में हरसिंगार केशर से चर्चित सुमन-लाज;कंटकित रसालों पर उठताहै पागल पिक मुझको पुकार!लहराती आती मधु-बयार !!
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