ग़ज़ल

मैं अनंत पथ में लिखती जो

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
मै अनंत पथ में लिखती जोसस्मित सपनों की बातेउनको कभी न धो पायेंगीअपने आँसू से रातें!
उड़् उड़ कर जो धूल करेगीमेघों का नभ में अभिषेकअमिट रहेगी उसके अंचल-में मेरी पीड़ा की रेख!
तारों में प्रतिबिम्बित होमुस्कायेंगी अनंत आँखें,हो कर सीमाहीन, शून्य मेंमँडरायेगी अभिलाषें!
वीणा होगी मूक बजाने-वाला होगा अंतर्धान,विस्मृति के चरणों पर आ करलौटेंगे सौ सौ निर्वाण!
जब असीम से हो जायेगामेरी लघु सीमा का मेल,देखोगे तुम देव! अमरताखेलेगी मिटने का खेल!
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