ग़ज़ल

क्यों इन तारों को उलझाते?

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
क्यों इन तारों को उलझाते?अनजाने ही प्राणों में क्योंआ आ कर फिर जाते?
पल में रागों को झंकृत कर,फिर विराग का अस्फुट स्वर भर,मेरी लघु जीवन वीणा परक्या यह अस्फुट गाते?
लय में मेरा चिर करुणा-धनकम्पन में सपनों का स्पन्दनगीतों में भर चिर सुख चिर दुखकण कण में बिखराते!
मेरे शैशव के मधु में घुलमेरे यौवन के मद में ढुलमेरे आँसू स्मित में हिल मिलमेरे क्यों न कहाते?
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