ग़ज़ल

कोयल

महादेवी वर्मा · सब कलाम देखें
डाल हिलाकर आम बुलातातब कोयल आती है।नहीं चाहिए इसको तबला,नहीं चाहिए हारमोनियम,छिप-छिपकर पत्तों में यह तोगीत नया गाती है!
चिक्-चिक् मत करना रे निक्की,भौंक न रोजी रानी,गाता एक, सुना करते हैंसब तो उसकी बानी।
आम लगेंगे इसीलिए यहगाती मंगल गाना,आम मिलेंगे सबको, इसकोनहीं एक भी खाना।
सबके सुख के लिए बेचारीउड़-उड़कर आती है,आम बुलाता है, तब कोयलकाम छोड़ आती है।
''साभार: नंदन-मई, 2005, पृष्ठ 20''
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