ग़ज़ल
कौन तुम मेरे हृदय में
कौन तुम मेरे हृदय में?
कौन मेरी कसक में नितमधुरता भरता अलक्षित?कौन प्यासे लोचनों मेंघुमड़ घिर झरता अपरिचित?
स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरानींद के सूने निलय में!कौन तुम मेरे हृदय में?
अनुसरण निश्वास मेरेकर रहे किसका निरन्तर?चूमने पदचिन्ह किसकेलौटते यह श्वास फिर फिर
कौन बन्दी कर मुझे अबबँध गया अपनी विजय में?कौन तुम मेरे हृदय में?
एक करूण अभाव में चिर-तृप्ति का संसार संचितएक लघु क्षण दे रहानिर्वाण के वरदान शत शत,
पा लिया मैंने किसे इसवेदना के मधुर क्रय में?कौन तुम मेरे हृदय में?
गूँजता उर में न जानेदूर के संगीत सा क्या?आज खो निज को मुझेखोया मिला, विपरीत सा क्या
क्या नहा आई विरह-निशिमिलन-मधु-दिन के उदय में?कौन तुम मेरे हृदय में?
तिमिर-पारावार मेंआलोक-प्रतिमा है अकम्पितआज ज्वाला से बरसताक्यों मधुर घनसार सुरभित?
सुन रहीं हूँ एक हीझंकार जीवन में, प्रलय में?कौन तुम मेरे हृदय में?
मूक सुख दुख कर रहेमेरा नया श्रृंगार सा क्या?झूम गर्वित स्वर्ग देता-नत धरा को प्यार सा क्या?
आज पुलकित सृष्टि क्याकरने चली अभिसार लय मेंकौन तुम मेरे हृदय में?
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