ग़ज़ल
जीवन दीप
किन उपकरणों का दीपक,किसका जलता है तेल?किसकि वर्त्ति, कौन करताइसका ज्वाला से मेल?
शून्य काल के पुलिनों पर-जाकर चुपके से मौन,इसे बहा जाता लहरों मेंवह रहस्यमय कौन?
कुहरे सा धुँधला भविष्य है,है अतीत तम घोर ;कौन बता देगा जाता यहकिस असीम की ओर?
पावस की निशि में जुगनू का-ज्यों आलोक-प्रसार।इस आभा में लगता तम काऔर गहन विस्तार।
इन उत्ताल तरंगों पर सह-झंझा के आघात,जलना ही रहस्य है बुझना -है नैसर्गिक बात !
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