ग़ज़ल
तितली से
मेह बरसने वाला हैमेरी खिड़की में आ जा तितली।
बाहर जब पर होंगे गीले,धुल जाएँगे रंग सजीले,झड़ जाएगा फूल, न तुझकोबचा सकेगा छोटी तितली,खिड़की में तू आ जा तितली!
नन्हे तुझे पकड़ पाएगा,डिब्बी में रख ले जाएगा,फिर किताब में चिपकाएगामर जाएगी तब तू तितली,खिड़की में तू छिप जा तितली।
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