ग़ज़ल
चंचल न हूजै नाथ
चंचल न हूजै नाथ, अंचल न खैंची हाथ ,सोवै नेक सारिकाऊ, सुकतौ सोवायो जू .मंद करौ दीप दुति चन्द्रमुख देखियत ,दारिकै दुराय आऊँ द्वार तौ दिखायो जू .मृगज मराल बाल बाहिरै बिडारि देउं,भायो तुम्हैं केशव सो मोहूँमन भायो जू .छल के निवास ऐसे वचन विलास सुनि,सौंगुनो सुरत हू तें स्याम सुख पुओ जू .
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