ग़ज़ल
उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया
उसे हमने बहुत ढूँढा न पायाअगर पाया तो खोज अपना न पाया
जिस इन्साँ को सगे-दुनिया न पायाफ़रिश्ता उसका हमपाया न पाया
मुक़द्दर से ही गर सूदो-ज़ियाँ हैतो हमने याँ न कुछ खोया न पाया
अहाते से फ़लक़ के हम तो कब केनिकल जाते मगर रस्ता न पाया
जहाँ देखा किसी के साथ देखाकहीं हमने तुझे तन्हा न पाया
किया हमने सलामे- इश्क़ तुझको!कि अपना हौसला इतना न पाया
न मारा तूने पूरा हाथ क़ातिल!सितम में भी तुझे पूरा न पाया
लहदमें भी तेरे मुज़तर ने आरामख़ुदा जाने कि पाया या न पाया
कहे क्या हाय ज़ख़्मे-दिल हमाराज़ेहन पाया लबे-गोया न पाया
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