ग़ज़ल

और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत करके

हसरत मोहानी · सब कलाम देखें
और भी हो गए बेग़ाना वो गफ़लत करकेआज़माया जो उन्हें तर्के-मुहब्बत करके
दिल ने छोड़ा है न छोड़े तेरे मिलने का ख़यालबारहा देख लिया हमने मलामत करके
रुह ने पाई है तकलीफ़े-जुदाई से निजातआपकी याद को सरमाया-ए-राहत करके
छेड़ से अब वो ये कहते हैं कि सँभलो 'हसरत'सब्रो-ताबे-दिल-बीमार को ग़ारत करके
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