ग़ज़ल

सब्र मुश्किल है, ज़ब्त है दुशवार

हसरत मोहानी · सब कलाम देखें
सब्र मुश्किल है, ज़ब्त है दुशवारदिले-वहशी है और जुनूने-बहार
लुत्फ़ कर लुत्फ़, ऐ सरापा नाज़ !तुझपे रंगीनी-ए-बहार निसार
रुह आज़ाद है ख़याल आज़ादजिस्मे-’हसरत’ की क़ैद है बेकार
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