ग़ज़ल

सब हैं तेरी अंजुमन में बेहोश

हसरत मोहानी · सब कलाम देखें
सब हैं तेरी अंजुमन में बेहोशनज़्ज़ाराए-हुस्न का किसे होश
बेहोश किया है सबको तूनेअब जिसको ख़ुदाए-होश दे होश
हो जाऊँ निसारे-हैरते-इश्क़ऐ दानिश-ओ-ऐ-करार-ओ-ऐ होश !
हम अरसाए-हश्र में भी ’हसरत’पहचान गए उन्हें ज़हे होश
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