ग़ज़ल

सियहकार थे बासफ़ा हो गए हम

हसरत मोहानी · सब कलाम देखें
सियहकार थे बासफ़ा हो गए हमतेरे इश्क़ में क्या से क्या हो गए हम
न जाना कि शौक़ और भड़केगा मेरावो समझे कि उससे जुदा हो गए हम
उन्हें रंज अब क्यों हुआ? हम तो ख़ुश हैंकि मरकर शहीदे-वफ़ा हो गए हम
तेरी फ़िक्र का मुब्तला हो गया दिलमगर क़ैदे-ग़म से रिहा हो गए हम
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