ग़ज़ल

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

हरिवंशराय बच्चन · सब कलाम देखें
क्षण भर को क्यों प्यार किया था?
अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर,पलक संपुटों में मदिरा भरतुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था?क्षण भर को क्यों प्यार किया था?
‘यह अधिकार कहाँ से लाया?’और न कुछ मैं कहने पाया -मेरे अधरों पर निज अधरों का तुमने रख भार दिया था!क्षण भर को क्यों प्यार किया था?
वह क्षण अमर हुआ जीवन में,आज राग जो उठता मन में -यह प्रतिध्वनि उसकी जो उर में तुमने भर उद्गार दिया था!क्षण भर को क्यों प्यार किया था?
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