ग़ज़ल

को‌ई गाता मैं सो जाता

हरिवंशराय बच्चन · सब कलाम देखें
संसृति के विस्तृत सागर मेंसपनों की नौका के अंदरदुख सुख की लहरों मे उठ गिरबहता जाता, मैं सो जाता ।
आँखों में भरकर प्यार अमरआशीष हथेली में भरकरको‌ई मेरा सिर गोदी में रखसहलाता, मैं सो जाता ।
मेरे जीवन का खारा जलमेरे जीवन का हालाहलको‌ई अपने स्वर में मधुमय करबरसाता मैं सो जाता ।
को‌ई गाता मैं सो जातामैं सो जातामैं सो जाता
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