ग़ज़ल

क़दम बढाने वाले: कलम चलाने वाले

हरिवंशराय बच्चन · सब कलाम देखें
अगर तुम्हारा मुकाबलादीवार से है,पहाड़ से है,खाई-खंदक से,झाड़-झंकाड़ से हैतो दो ही रास्ते हैं-दीवार को गिराओ,पहाड़ को काटो,खाई-खंदक को पाटो,झाड़-झंकाड़ को छांटो, दूर हटाओऔर एसा नहीं कर सकते-सीमाएँ सब की हैं-तो उनकी तरफ पीठ करो, वापस आओ।प्रगति एक ही राह से नहीं चलती है,लौटने वालों के साथ भी रहती है।तुम कदम बढाने वालों में होकलम चलाने वालो में नहींकि वहीं बैठ रहोऔर गर्यवरोध पर लेख-पर-लेखलिखते जाओ।
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