ग़ज़ल

एक नया अनुभव

हरिवंशराय बच्चन · सब कलाम देखें
मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एककविता लिखना चाहता हूँ।चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों मेंमेरे परों की रंगीनी है?'मैंने कहा, 'नहीं'।'तुम्हारे शब्दों में मेरे कंठ का संगीत है?''नहीं।''तुम्हारे शब्दों में मेरे डैने की उड़ान है?''नहीं।''जान है?''नहीं।''तब तुम मुझ पर कविता क्या लिखोगे?'मैनें कहा, 'पर तुमसे मुझे प्यार है'चिड़िया बोली, 'प्यार का शब्दों से क्या सरोकार है?'एक अनुभव हुआ नया।मैं मौन हो गया!
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