ग़ज़ल
आज़ादी का गीत
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल
चांदी, सोने, हीरे मोती से सजती गुड़ियाइनसे आतंकित करने की घडियां बीत गईइनसे सज धज कर बैठा करते हैं जो कठपुतलेहमने तोड़ अभी फेंकी हैं हथकडियां
परम्परागत पुरखो की जागृति की फिर सेउठा शीश पर रक्खा हमने हिम-किरीट उज्ज्वलहम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल
चाँदी, सोने, हीरे, मोती से सजवा छातेजो अपने सिर धरवाते थे अब शरमातेफूल कली बरसाने वाली टूट गई दुनियावज्रों के वाहन अम्बर में निर्भय गहराते
इन्द्रायुध भी एक बार जो हिम्मत से ओटेछत्र हमारा निर्मित करते साठ-कोटी करतलहम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल
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