ग़ज़ल

आदर्श प्रेम

हरिवंशराय बच्चन · सब कलाम देखें
प्यार किसी को करना लेकिनकह कर उसे बताना क्याअपने को अर्पण करना परऔर को अपनाना क्या
गुण का ग्राहक बनना लेकिनगा कर उसे सुनाना क्यामन के कल्पित भावों सेऔरों को भ्रम में लाना क्या
ले लेना सुगंध सुमनों कीतोड़ उन्हें मुरझाना क्याप्रेम हार पहनाना लेकिनप्रेम पाश फैलाना क्या
त्याग अंक में पले प्रेम शिशुउनमें स्वार्थ बताना क्यादे कर हृदय हृदय पाने कीआशा व्यर्थ लगाना क्या
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