ग़ज़ल
आँसू और आँखें
दिल मचलता ही रहता है ।सदा बेचैनी रहती है ।लाग में आ आकर चाहत ।न जाने क्या क्या कहती है ।।१।।
कह सके यह कोई कैसे ।आग जी की बुझ जाती है ।कौन सा रस पाती है जो ।आँख आँसू बरसाती है ।।२।।
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.