ग़ज़ल

अपने दुखड़े

अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' · सब कलाम देखें
देश को जिस ने जगाया जगे सोने न दिया।आग घर घर में बुरी फूट को बोने न दिया।1।
है वही बीर पिया दूध उसी ने माँ का।जाति को जिसने जिगर थाम के रोने न दिया।2।
बन गये भोले बहुत, अपनी भलाई भूली।है इसी भूल ने अब तक भला होने न दिया।3।
बार से कैसे दुखों के न भला दब जाते।ऐब अपना हमें अदबार ने खोने न दिया।4।
किस तरह बात बने क्यों न दबा अनबन ले।प्यार का बोझ बनावट ने तो ढोने न दिया।5।
हो सके मेल क्यों हम कैसे गले मिल पावें।मैल जी का बुरे मैलान ने खोने न दिया।6।
तो किसी काम की रंगत न रही जो उसने।भाव रंगों में उमंगों को भिगोने न दिया।7।
लाल माई का हमें लोग कहेंगे कैसे।प्रेम आँसू ने अगर मोती पिरोने न दिया।8।
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