ग़ज़ल
ममता तू न गई मेरे मन तें
ममता तू न गई मेरे मन तें॥पाके केस जनमके साथी, लाज गई लोकनतें।तन थाके कर कंपन लागे, ज्योति गई नैननतें॥१॥सरवन बचन न सुनत काहुके बल गये सब इंद्रिनतें।टूटे दसन बचन नहिं आवत सोभा गई मुखनतें॥२॥कफ पित बात कंठपर बैठे सुतहिं बुलावत करतें।भाइ-बंधु सब परम पियारे नारि निकारत घरतें॥३॥जैसे ससि-मंडल बिच स्याही छुटै न कोटि जतनतें।तुलसीदास बलि जाउँ चरनते लोभ पराये धनतें॥४॥
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