ग़ज़ल

माधव, मोह-पास क्यों छूटै

गोस्वामी तुलसीदास · सब कलाम देखें
माधव, मोह-पास क्यों छूटै।बाहर कोट उपाय करिय अभ्यंतर ग्रन्थि न छूटै॥१॥घृतपूरन कराह अंतरगत ससि प्रतिबिम्ब दिखावै।ईंधन अनल लगाय कल्पसत औंटत नास न पावै व२॥तरु-कोटर मँह बस बिहंग तरु काटे मरै न जैसे।साधन करिय बिचारहीन मन, सुद्ध होइ नहिं तैसे॥३॥अंतर मलिन, बिषय मन अति, तन पावन करिय पखारे।मरै न उरक अनेक जतन बलमीकि बिबिध बिधि मारे॥४॥तुलसीदास हरि गुरु करुना बिनु बिमल बिबेक न होई।बिनु बिबेक संसार-घोरनिधि पार न पावै कोई॥५॥
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