ग़ज़ल

देव! दूसरो कौन दीनको दयालु

गोस्वामी तुलसीदास · सब कलाम देखें
देव! दूसरो कौन दीनको दयालु।सीलनिधान सुजान-सिरोमनि,सरनागत-प्रिय प्रनत-पालु॥१॥को समरथ सर्बग्य सकल प्रभु,सिव-सनेह मानस-मरालु।को साहिब किये मीत प्रीतिबस,खग निसिचर कपि भील-भालु॥२॥नाथ, हाथ माया-प्रपंच सब,जीव-दोष-गुन-करम-कालु।तुलसीदास भलो पोच रावरो,नेकु निरखि कीजिये निहालु॥३॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh