ग़ज़ल

जागिये कृपानिधान जानराय, रामचन्द्र

गोस्वामी तुलसीदास · सब कलाम देखें
जागिये कृपानिधान जानराय, रामचन्द्र!जननी कहै बार-बार, भोर भयो प्यारे॥राजिवलोचन बिसाल, प्रीति बापिका मराल,ललित कमल-बदन ऊपर मदन कोटि बारे॥अरुन उदित, बिगत सर्बरी, ससांक-किरन ही,दीन दीप-ज्योति मलिन-दुति समूह तारे॥मनहुँ ग्यान घन प्रकास बीते सब भव बिलास,आस त्रास तिमिर-तोष-तरनि-तेज जारे॥बोलत खग निकर मुखर, मधुर, करि प्रतीति,सुनहु स्त्रवन, प्रान जीवन धन, मेरे तुम बारे॥मनहुँ बेद बंदी मुनिबृन्द सूत मागधादि बिरुद-बदत 'जय जय जय जयति कैटभारे'॥बिकसित कमलावली, चले प्रपुंज चंचरीक,गुंजत कल कोमल धुनि त्यगि कंज न्यारे।जनु बिराग पाइ सकल सोक-कूप-गृह बिहाइ॥भृत्य प्रेममत्त फिरत गुनत गुन तिहारे,सुनत बचन प्रिय रसाल जागे अतिसय दयाल।भागे जंजाल बिपुल, दुख-कदम्ब दारे।तुलसीदास अति अनन्द, देखिकै मुखारबिंद,छूटे भ्रमफंद परम मंद द्वंद भारे॥
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