ग़ज़ल
जो मोहि राम लागते मीठे
जो मोहि राम लागते मीठे।तौ नवरस, षटरस-रस अनरस ह्वै जाते सब सीठे॥१॥बंचक बिषय बिबिध तनु धरि अनुभवे, सुने अरु डीठे।यह जानत हौं ह्रदय आपने सपने न अघाइ उबीठे॥२॥तुलसीदास प्रभु सो एकहिं बल बचन कहत अति ढीठे।नामकी लाज राम करुनाकर केहि न दिये कर चीठे॥३॥
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