ग़ज़ल

जो मन लागै रामचरन अस

गोस्वामी तुलसीदास · सब कलाम देखें
जो मन लागै रामचरन अस।देह गेह सुत बित कलत्र महँ मगन होत बिनु जतन किये जस॥द्वंद्वरहित गतमान ग्यान-रत बिषय-बिरत खटाइ नाना कस।सुखनिधान सुजान कोसलपति ह्वै प्रसन्न कहु क्यों न होहिं बस॥सर्बभूताहित निर्ब्यलीक चित भगति प्रेम दृढ़ नेम एक रस।तुलसीदास यह होइ तबहि जब द्रवै ईस जेहि हतो सीस दस॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh