ग़ज़ल
बदनाम रहे बटमार मगर
बदनाम रहे बटमार मगर, घर तो रखवालों ने लूटामेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा
दो दिन के रैन बसेरे की,हर चीज़ चुराई जाती हैदीपक तो अपना जलता है,पर रात पराई होती हैगलियों से नैन चुरा लाएतस्वीर किसी के मुखड़े कीरह गए खुले भर रात नयन, दिल तो दिलदारों ने लूटामेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा
शबनम-सा बचपन उतरा था,तारों की गुमसुम गलियों मेंथी प्रीति-रीति की समझ नहीं,तो प्यार मिला था छलियों सेबचपन का संग जब छूटा तोनयनों से मिले सजल नयनानादान नये दो नयनों को, नित नये बजारों ने लूटामेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा
हर शाम गगन में चिपका दी,तारों के अक्षर की पातीकिसने लिक्खी, किसको लिक्खी,देखी तो पढ़ी नहीं जातीकहते हैं यह तो किस्मत हैधरती के रहनेवालों कीपर मेरी किस्मत को तो इन, ठंडे अंगारों ने लूटामेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा
अब जाना कितना अंतर है,नज़रों के झुकने-झुकने मेंहो जाती है कितनी दूरी,थोड़ा-सी रुकने-रुकने मेंमुझ पर जग की जो नज़र झुकीवह ढाल बनी मेरे आगेमैंने जब नज़र झुकाई तो, फिर मुझे हज़ारों ने लूटामेरी दुल्हन-सी रातों को नौ लाख सितारों ने लूटा
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