ग़ज़ल
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे ।।
मंदिर-मंदिर मूरत तेरी, फिर भी न दीखे सूरत तेरी ।युग बीते, ना आई मिलन की पूरनमासी रे ।।दर्शन दो घनश्याम, नाथ ! मोरि अँखियाँ प्यासी रे ।।
द्वार दया का जब तू खोले, पंचम सुर में गूंगा बोले ।अंधा देखे, लंगड़ा चल कर पँहुचे काशी रे ।।दर्शन दो घनश्याम, नाथ ! मोरी अँखियाँ प्यासी रे ।।
पानी पी कर प्यास बुझाऊँ, नैनन को कैसे समझाऊँ ।आँख मिचौली छोड़ो अब तो, घट-घट वासी रे ।।दर्शन दो घनश्याम, नाथ ! मोरी अँखियाँ प्यासी रे ।।
फ़िल्म 'नरसी भगत'
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