ग़ज़ल कितना कोमल, कितना वत्सल गोपाल सिंह नेपाली · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन कितना कोमल,कितना वत्सल,रे ! जननी कावह अंतस्तल,जिसका यह शीतलकरुणा जल,बहता रहतायुग-युग अविरल पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh