ग़ज़ल
किसी से मेरी प्रीत लगी अब क्या करूँ
हाय किसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँअब क्या करूँ रेअब क्या करूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँ
पास-पड़ोस मैंपास-पड़ोस मैं बाजा बजे रेदूल्हा के संग नयी दुल्हन सजे रेमें तो बड़ी-बड़ीमें तो बड़ी-बड़ीआँखों वाली देखा करूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँअब क्या करूँ रेअब क्या करूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँ
हायकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँसोलह बरस की में तोखुशबू हूँ खास की में तोबाँकी-मतवाली में टोप्याली हूँ रस की
चढ़ती उमर नहींबात मेरे बस कीजवानी मेरे बस कीनहीं जी मेरे बस कीहाय मोर रामाअकेली यहाँ पड़ी-पड़ीआहें भरूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँअब क्या करूँ रेअब क्या करूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँ
अब ना रुकूँगी किसी के रोकेपीहर चलूँगीमें पिया की हो केडोलिया हिले-डोलेडोलिया हिले-डोलेमें तो बैठी रहूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँअब क्या करूँ रेअब क्या करूँकिसी से मेरी प्रीत लगीअब क्या करूँ.
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.