ग़ज़ल
ओ दुपट्टा रंग दे मेरा रंगरेज
ओ दुपट्टा रंग दे मेरा रंगरेजहो गयी सरसों पीली-पीलीआज हरी कल लाल चदरियापरसों ओढू नीली-नीलीओ दुपट्टा रंग दे मेरा रंगरेजहो गयी सरसों पीली-पीली...
सुबह को पहनूँ तो सजनवाआस पास मंडलाएशाम को पहनूँ तो बलमघर छोड़ कहीं न जाएबलम घर छोड़ कहीं न जायेरात अंधेरी हो तो हो जाऊँजुगनू सी चमकीलीओ दुपट्टा रंग दे मेरा रंगरेजहो गयी सरसों पीली-पीली...
मन में नई उमंगअंग में चुनरी ढीली-ढीलीअपने पिया से कुछ न सीखूँजब न मुझे तन ढीली पड़ गयीजब न मुझे तन ढीलीहोंठ रंगूँ मैं लाल गुलाबी आँखों से शर्मीलीओ दुपट्टा रंग दे मेरा रंगरेजहो गयी सरसों पीली-पीली...
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