ग़ज़ल
दूर जाकर न कोई बिसारा करे
दूर जाकर न कोई बिसारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे,यूँ बिछड़ कर न रतियाँ गुज़ारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
मन मिला तो जवानी रसम तोड़ दे, प्यार निभता न हो तो डगर छोड़ दे,दर्द देकर न कोई बिसारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
खिल रही कलियाँ आप भी आइए, बोलिए या न बोले चले जाइए,मुस्कुराकर न कोई किनारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
चाँद-सा हुस्न है तो गगन में बसे, फूल-सा रंग है तो चमन में हँसे,चैन चोरी न कोई हमारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
हमें तकें न किसी की नयन खिड़कियाँ, तीर-तेवर सहें न सुनें झिड़कियाँ,कनखियों से न कोई निहारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
लाख मुखड़े मिले और मेला लगा, रूप जिसका जँचा वो अकेला लगा,रूप ऐसे न कोई सँवारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
रूप चाहे पहन नौलखा हार ले, अंग भर में सजा रेशमी तार ले,फूल से लट न कोई सँवारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
पग महावर लगाकर नवेली रंगे, या कि मेंहदी रचाकर हथेली रंगे,अंग भर में न मेंहदी उभारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
आप पर्दा करें तो किए जाइए, साथ अपनी बहारें लिए जाइए,रोज़ घूँघट न कोई उतारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
एक दिन क्या मिले मन उड़ा ले गए, मुफ़्त में उम्र भर की जलन दे गए,बात हमसे न कोई दुबारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे।
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