ग़ज़ल
छवि को सदन मोद मंडित
छवि को सदन मोद मंडित बदन-चंद::तृषित चषनि लाल, कबधौ दिखाय हौ।चटकीलौ भेष करें मटकीली भाँति सौही::मुरली अधर धरे लटकत आय हौ।लोचन ढुराय कछु मृदु मुसिक्याय, नेह::भीनी बतियानी लड़काय बतराय हौ।बिरह जरत जिय जानि, आनि प्रान प्यारे,::कृपानिधि, आनंद को धन बरसाय हौ।
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